टैरिफ का डर, आरक्षण और 3 बच्चों का फॉर्मूला; संघ प्रमुख मोहन भागवत की 5 बड़ी बातें

कृतिका भारद्वाज
जनादेश lआरएसएस के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में शामिल होने पहुंचे सर संघचालक मोहन भागवत ने रविवार को गढ़ी कैंट से राष्ट्र की मजबूती और सामाजिक ढांचे पर एक बड़ा विजन साझा किया। भागवत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत को इतना सशक्त होना होगा कि कोई हमें टैरिफ का डर न दिखा सके, क्योंकि दुनिया सत्य को नहीं शक्ति को पूजती है। उन्होंने जनसंख्या संतुलन के लिए ‘तीन बच्चों’ के फॉर्मूले को सुरक्षित बताया। आरक्षण को तब तक जरूरी बताया, जब तक समाज से भेदभाव पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता। मैकाले की शिक्षा पद्धति को बदलने की बात की और एक बार फिर सभी भारतीयों का एक डीएनए होने का तर्क दिया। उन्होंने साफ किया कि संघ सत्ता नहीं चाहता और न ही वह भाजपा को नियंत्रित करता है।मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्र को इतना मजबूत बनाया जाए कि कोई भी हमें टैरिफ का डर न दिखा पाए। कहा कि जब राष्ट्र सुरक्षित और प्रतिष्ठित होता है, तो विश्व में भी हम सुरक्षित होते हैं। यदि हम मजबूत नहीं हैं, तो हम देश के भीतर भी सुरक्षित नहीं हैं।टैरिफ का डर
आरएसएस के शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों रविवार को गढ़ी कैंट स्थित कल्चरल सेंटर में उन्होंने कहा कि अपने स्वदेशी सिस्टम को हमें मजबूत बनाना होगा। तभी हम विकसित राष्ट्र, विश्व गुरु बनेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में विश्व का हर रास्ता भारत से ही होकर निकलेगा। स्वार्थ, भेदभाव से मुक्त होकर ही हम देश को सुरक्षित, प्रतिष्ठित बना सकते हैं।
उन्होंने कहा कि कि एक दौर में युगांडा से ईदी अमीन ने भारतीयों को भगा दिया था। आज हम विश्व भर में सुरक्षित हैं। कमजोर को सभी दबाते हैं। विश्व भी सत्य को नहीं शक्ति को पहचानता है। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, गुणवत्ता से ही देश का उत्थान हो सकता है। इसके लिए हमें भेद भुलाने होंगे। देश को मजबूत करने को आम जन में राष्ट्रभाव जागृत करना होगा। कहा कि देश के भीतर भले ही हम लोग आपस में लड़ते हों। संसद में एक दूसरे के कपड़े फाड़े जाते हों, लेकिन जब बात देश की आती है, तो सभी एक हो जाते हैं। विश्व भर में मिल कर देश की समृद्धि, शक्ति, एकजुटता का प्रचार करते हैं।
उल्टी शिक्षा व्यवस्था को बदलने में लगेगा समय
भागवत ने कहा कि मैकाले की 150 साल पुरानी उल्टी शिक्षा व्यवस्था को बदलने में समय लगेगा। इस दिशा में प्रयास शुरू हो गए हैं। अगले कुछ सालों में ये संभव हो पाएगा। बच्चों को संस्कार बनाने को घर में भी प्रयास करने होंगे। कहा कि युवाओं को आज की जरूरत के लिहाज से तैयार करने को कौशल विकास के क्षेत्र में भी संघ आने वाले समय में काम करेगा। भागवत ने कहा कि संस्कार और तकनीक में समन्वय, अनुशासन बनाना जरूरी है। संस्कार, अनुशासन की कीमत पर तकनीक बेहतर नहीं है। इसे पाने को मानवीयता की बलि देना ठीक नहीं है। जेन जी पर कहा कि उनके सवालों का जवाब देने को जानकारी बढ़ानी होगी। उन्हें सही बात बताई जाए। आदर्श प्रस्तुत किया जाए।
संघ भाजपा को कंट्रोल नहीं करती
संघ प्रमुख मोहन भागवत बोले कि लोगों को गलतफहमी है कि संघ भाजपा को नियंत्रित करता है। संघ को सत्ता नहीं चाहिए। भले ही स्वयं सेवक सत्ता में हों। सत्ता में जाने वाले स्वयंसेवक संघ से त्यागपत्र देकर जाते हैं। वे बिना संघ के चल सकते हैं। भले ही वे बिना संघ के नहीं चलते। क्योंकि वहां भी स्वयंसेवक हैं, इसीलिए सम्बन्ध हैं। संघ की विशेषज्ञता राजनीति नहीं है। उन्होंने कहा कि जो भी संघ से मदद मांगता है, उसकी मदद की जाती है। संघ का काम सिर्फ व्यक्ति निर्माण और संपूर्ण समाज को संगठित करना है।
तीन बच्चों का फॉर्मूला
भागवत ने कहा कि डेमोग्राफी में बदलाव, असंतुलन से राष्ट्र टूट जाते हैं। डेमोग्राफी बैलेंस बनाने की जरूरत है। इसके लिए तीन बच्चों का आंकड़ा सेफ है। उन्होंने कहा कि जनसंख्या हमारे लिए बोझ न बने, बल्कि इसका बेहतर उपयोग हो सके, इसके लिए नीति बनाने की जरूरत है। शिक्षा, स्वास्थ्य समेत तमाम संसाधनों का कैसे भविष्य में इंतजाम होगा, इसके लिए जनसंख्या को लेकर प्लानिंग की जरूरत है। जनसंख्या नियंत्रण कानून को लेकर पहले मन बनाने की जरूरत है।
देश की आजादी में संघ की अहम भूमिका
भागवत ने कहा कि आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार कभी भी अंग्रेजों के आगे नहीं झूके। बाल्यकाल में ही उन्होंने अंग्रेजों की गुलामी का विरोध किया। वे पश्चिम भारत में क्रांतिकारी समिति के कोर कमेटी सदस्य रहे। बाद में राजस्थान से लेकर आंध्र प्रदेश तक का जिम्मा उन पर रहा। विदर्भ के गांवों में असहयोग आंदोलन को संभाला। राजद्रोह का केस उन पर लगा। रासबिहारी बोस, वीर सावरकर, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, अरविंद बोस के साथ मुहिम में रहे। बाद में उन्होंने गुलामी जैसे हालात पैदा ही न हों, इसके लिए संघ की स्थापना कर व्यक्ति निर्माण पर काम किया।
भारत के सभी लोगों का एक डीएनए
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि वे फिर इस बात को दोहरा रहे हैं कि देश के सभी लोगों का डीएनए एक ही है। वे ये बात खुद नहीं कह रहे हैं, बल्कि ये बात वैज्ञानिक प्रमाणित है। कहा कि खानपान, पूजा, रीति रिवाज भले ही अलग अलग हो, लेकिन इन सबसे ऊपर सभी को आपस में एक सूत्र में जोड़ना ही हिंदुत्व है। कहा कि अखंड भारत के क्षेत्र से जुड़े सभी लोग, भले ही वे किसी भी धर्म के हों, वे आज भी वंशावली देखते हैं। आज भी हिंदु, मुस्लिम, ईसाई परिवारों में वंशावली लेखक आते हैं। कहा कि हिंदू का स्वभाव ही शालीन है। हिंदू धर्म को कभी सफेद चोला पहन कर अध्यात्म, धर्म को बेचना नहीं पड़ा। किसी भी धर्म के अध्यात्म में विश्वास में रखने वाले क्रूर नहीं होते। सिर्फ कर्मकांड तक सीमित रहने वाले ही क्रूर होते हैं। हिंदू समाज को संगठित करना जरूरी है। कमजोर को सभी दबाते हैं। यदि शक्ति की उपासना छोड़ी तो संख्या में अधिक होने पर कमजोर हो तो हैं। सामाजिक रूप से संगठित होने पर कोई डरा नहीं सकता।
आरक्षण कब तक सही
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि जब तक समाज में भेदभाव है, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में देशभर में हो रहे कार्यक्रमों की कड़ी में संघ प्रमुख रविवार को देहरादून में थे। भागवत ने कहा कि आरक्षण के लिए संविधान में तय प्रावधानों का पालन किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यह सामाजिक चेतना का असर है कि आरक्षण का लाभ लेकर संपन्न हो चुके लोग अब इसका लाभ छोड़ने लगे हैं।
उन्होंने कहा कि जब तक सामाजिक विषमता है, तब तक भेदभाव है। शहरों में अस्पृश्यता के मामले अलग तरीके से देखे जाते हैं जबकि गांवों में भेदभाव अलग तरीके से सामने आता है। इस भेदभाव को सामाजिक समरसता से ही समाप्त किया जा सकता है। संघ इसी दिशा में लगातार सक्रिय है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती। साथ ही हिंदू शास्त्रों में भी सामाजिक कुरीतियों और भेदभाव की कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज में पूरी तरह सद्भाव बनने तक संयम रखना होगा।



