फ्री टूरिस्ट स्पॉट पर ‘एंट्री माफिया’ का कब्जा! जॉर्ज एवरेस्ट में 200 रुपये वसूली से भड़का विवाद

सार्वजनिक सड़क पर अवैध शुल्क वसूली का आरोप, पर्यटकों और स्थानीय व्यापारियों में आक्रोश
कृतिका भारद्वाज
उत्तराखंड के प्रसिद्ध और लंबे समय से फ्री टूरिस्ट स्पॉट रहे मसूरी स्थित जॉर्ज एवरेस्ट में प्रवेश के नाम पर 200 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क वसूली का मामला अब गंभीर विवाद का रूप ले चुका है। इस कथित अवैध वसूली को लेकर पर्यटकों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस मार्ग से पर्यटक जॉर्ज एवरेस्ट पहुंचते हैं, वह नगर पालिका द्वारा निर्मित सार्वजनिक सड़क है, जहां किसी भी प्रकार की एंट्री फीस या टोल वसूली नियमों के खिलाफ है। इसके बावजूद वहां तैनात निजी कर्मचारियों द्वारा न सिर्फ प्रवेश शुल्क, बल्कि वाहनों की पार्किंग के नाम पर मनमानी वसूली भी की जा रही है।
मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब स्थानीय व्यापारियों और राजनीतिक संगठनों ने इसे अवैध वसूली और जबरन शुल्क थोपने का मामला बताया। विरोध करने वालों का कहना है कि हाईकोर्ट पहले ही सार्वजनिक मार्गों पर टोल या शुल्क वसूलने पर रोक लगा चुका है, इसके बावजूद खुलेआम वसूली जारी है।
आरोप है कि शुल्क देने से इनकार करने वाले पर्यटकों को रोकने, डराने और वापस लौटने को मजबूर किया जा रहा है, जिससे क्षेत्र की छवि धूमिल हो रही है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि इस विवाद का सीधा असर पर्यटन और उनके रोजगार पर पड़ रहा है।नगर पालिका स्तर पर भी मामले को गंभीरता से लिया गया है और कथित रूप से मार्ग को खोलने व वसूली बंद करने को लेकर चेतावनी दी गई है। वहीं दूसरी ओर, प्रशासनिक चुप्पी और स्पष्ट कार्रवाई न होने से लोगों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।फिलहाल जॉर्ज एवरेस्ट में एंट्री फीस विवाद प्रशासन के लिए सिरदर्द बना हुआ है। सवाल यह है कि क्या यह वसूली वैध है या फिर फ्री टूरिस्ट स्पॉट को निजी कमाई का जरिया बना दिया गया है। अब सबकी नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।


