
कृतिका भारद्वाज जनादेश /जौनपुर।एमबीबीएस में दाखिला पाने की जुनूनी चाह ने एक युवक को इस हद तक धकेल दिया कि उसने खुद को दिव्यांग साबित करने के लिए अपने ही पैर का पंजा काट लिया। यह सनसनीखेज मामला जौनपुर के लाइन बाजार थाना क्षेत्र का है, जहां पुलिस जांच में युवक की खौफनाक साजिश का पर्दाफाश हुआ है।
लाइन बाजार निवासी सूरज भास्कर नीट की तैयारी कर रहा था और उसने वर्ष 2026 में हर हाल में एमबीबीएस में दाखिला लेने का लक्ष्य बना रखा था। इसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसने एक ऐसी झूठी कहानी गढ़ी कि शुरुआती तौर पर पुलिस भी भ्रमित हो गई।
सूरज ने पुलिस को बताया कि गुरुवार रात कुछ अज्ञात लोगों ने उसके साथ मारपीट की और जब वह होश में आया तो उसके बाएं पैर का पंजा कटा हुआ था। इस बयान के आधार पर पुलिस ने दो अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी।
हालांकि, जांच के दौरान सूरज बार-बार अपने बयान बदलता रहा, जिससे पुलिस को उस पर शक हो गया। पुलिस ने सर्विलांस की मदद से उसकी कॉल डिटेल खंगाली, जिसमें कई अहम सुराग मिले। जांच में सामने आया कि सूरज की एक प्रेमिका है, जिससे वह शादी करना चाहता है और किसी भी सूरत में एमबीबीएस में प्रवेश पाना उसका सपना था।
पूछताछ के लिए प्रेमिका को थाने बुलाया गया, जहां उसने बताया कि सूरज लंबे समय से 2026 में मेडिकल कॉलेज में दाखिले को लेकर बेहद तनाव में था। इसी कड़ी में यह भी सामने आया कि अक्टूबर माह में सूरज वाराणसी स्थित बीएचयू गया था, जहां उसने दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने की कोशिश की थी। दिव्यांग न होने के कारण उसका प्रमाण पत्र नहीं बन सका।
पुलिस के अनुसार, प्रमाण पत्र न मिलने के बाद सूरज ने खुद को दिव्यांग बनाने का खौफनाक फैसला कर लिया। सीओ सिटी गोल्डी गुप्ता ने बताया कि सूरज ने दर्द से बचने के लिए पहले खुद को इंजेक्शन लगाया और फिर ग्राइंडर मशीन की मदद से अपने पैर का पंजा काट लिया।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है। इस घटना ने न सिर्फ प्रशासन बल्कि समाज को भी झकझोर कर रख दिया है कि प्रतियोगी परीक्षाओं और दाखिले की अंधी दौड़ किस हद तक युवाओं को मानसिक रूप से तोड़ सकती है।



