
कृतिका भारद्वाज
जनादेश /उत्तराखंड /देहरादून। उत्तराखंड में अवस्थापना विकास और पर्यटन के क्षेत्र नई उड़ान भरेंगे। केंद्रीय बजट में इन क्षेत्रों को बड़ा प्रोत्साहन मिला है। अवस्थापना विकास में अगले वित्तीय वर्ष के लिए सार्वजनिक पूंजी व्यय में 12.2 लाख करोड़ की वृद्धि की गई है।केंद्र के इस कदम का लाभ उत्तराखंड को भी मिलने जा रहा है। इसी प्रकार पर्यटन के क्षेत्र में माउंटेन ट्रेल के साथ ही सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और विरासत महत्व वाले स्थानों के डिजिटल दस्तावेज तैयार करने के लिए नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नालेज ग्रिड की स्थापना से प्रदेश के ऐसे स्थलों के सुनियोजित विकास की राह प्रशस्त हो सकेगी। केंद्रीय बजट में जल जीवन मिशन में बड़ी राहत दी गई है। इस मिशन की अवधि को अब वर्ष 2018 तक बढ़ाया गया है।केंद्र की मोदी सरकार पूरे देश में अवस्थापना विकास को गति देने के लिए ताकत झोंक रही है। पिछले वित्तीय वर्षों में इस दिशा में उठाए गए कदमों का सीधा लाभ उत्तराखंड को भी हुआ है। उत्तराखंड के हिस्से में चारधाम आलवेदर रोड और ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेललाइन जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाएं आईं।
वहीं पिछले वित्तीय वर्ष में केदारनाथ, हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे जैसे प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ा है। सड़कों और पुलों के विकास के रूप में सामाजिक और आर्थिक के साथ सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सीमांत क्षेत्रों को बड़ी सहायता मिली है। नए वित्तीय वर्ष 2026-27 में भी केंद्र सरकार ने इस मद में बड़ी बजट राशि का प्रविधान किया है।इसी प्रकार पर्यटन और सेवा क्षेत्र के विकास के लिए केंद्रीय बजट में उठाए गए कदमों से उत्तराखंड को लाभ मिलना तकरीबन तय है। प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर्यटन, तीर्थाटन और सेवा सेक्टर पर ही मुख्य रूप से केंद्रित है। ऐसे में इस सेक्टर को मिलने वाला प्रोत्साहन राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति में सहायक होगा। उत्तराखंड में सस्टेनेबल माउंटेन ट्रेल से पर्वतारोहण और ट्रेकिंग के साथ बर्ड वाचिंग को बढ़ावा मिलेगा। साथ में इनका बेहतर प्रबंधन हो सकेगा।आयुष के क्षेत्र में जगी उम्मीद
उत्तराखंड को आयुष के क्षेत्र में उम्मीद जगी है। तीन नए अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान स्थापित किए जाने हैं। इनसें उत्तराखंड में आयुष फार्मेसी और औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं का उन्नयन संभव होगा। साथ ही आयुष उपचार से आमजन को राहत मिल सकेगी।
फार्मास्युटिकल और एमएसएमई के विस्तार के लिए केंद्र के बजट में प्रविधान हुए हैं। इन दोनों ही क्षेत्रों में उत्तराखंड मजबूती से कदम बढ़ा रहा है। पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां 95 प्रतिशत से अधिक एमएसएमई हैं।
साथ में प्रदेश के विकास को आइटी क्षेत्र के माध्यम से नई गति मिलने के अवसर बने हैं। आइटी सेवाओं के लिए सेफ हार्बर प्राप्त करने की सीमा को बढ़ाया गया है। इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स और ऊर्जा क्षेत्र को भी प्रोत्साहन दिया गया है।


