उत्तराखंड

उत्तराखंड की इस जेल में धनबल और बाहुबल का राज, कैदियों को मिलती है स्पेशल सर्विस

कृतिका भारद्वाज

जनादेश /उत्तराखंड /अल्मोड़ा । नियमों की धज्जियां उड़ाने को लेकर लगातार सुर्खियों में आ रही अल्मोड़ा जेल कुख्यात अपराधियों की एशगाह बनती रही है। बदमाश के जेल कर सलाखों के पीछे आते ही जरायाम की दुनियां में उसकी दहशत के हिसाब से उसे सुविधाएं मिलने लगती है। इसी के साथ ही उसका बाहुबल व धनबल का सिक्का चलना शुरू हो जाता है। यही नहीं अन्य कैदियों को भी सुविधा शुल्क के हिसाब से कामचोरी की छूट मिलती है। यहां तक कि उसे कैसा खाना मिलना है, क्या-क्या काम नहीं करने हैं, यह उसके द्वारा दिए जाने वाले धन के हिसाब से तय हो जाता है।वर्तमान में अल्मोड़ा जेल में 188 कैदी बंद हैं। सामान्य परिस्थितियों में यह जेल शांत मानी जाती है, लेकिन जैसे ही कोई कुख्यात गैंगस्टर, प्रभावशाली राजनेता या अंडरवर्ल्ड डान यहां निरुद्ध होता है, जेल सुर्खियों में आ जाती है। सूत्रों की मानें तो जिस कैदी ने जितने अधिक जघन्य अपराध किए होते हैं, जेल में उसका रुतबा उतना ही अधिक होता है। ऐसे कैदी को विशेष बैरक भी मुहैया करायी जाती है।सूत्रों की मानें तो अगर बदमाश कुख्यात है और दोनों हाथों से धन भी खर्च कर रहा है, तो उसे बैरक में ही होटल जैसी सुविधाएं मिलने लगी हैं। उसे सफाई व्यवस्था से लेकर रसोई में होने वाले कामों से मुक्त रखा जाता है। यही नहीं उसके लिए स्वादिष्ट खाना तक बैरक तक ही पहुंच जाता है। अगर एक से अधिक कुख्यात बंद हैं, तो उन्हें उनके हिसाब से एक साथ या अलग-अलग बैरक में रखा जाता है। उसके साथ कुछ छुटपुट आपराधिक घटनाओं में बंद कैदी भी रहते हैं, जो उनकी सेवा में अक्सर तत्पर रहते हैं। यह कैदी कुख्यात या धनवान कैदी के लिए सेवक के तौर पर काम करते हैं। यहां तक बाहुबली व धनवाल को अपने खाने के बर्तन धोने से मुक्त रखा जाता है। उनका यह काम भी शागिर्द की करते हैं।

मिलाई पर आने वाले साथी मुहैया करते हैं धन
सूत्रों की मानें तो कुख्यात बदमाशों के जो साथी बाहर होते हैं, उनकी जिम्मेदारी आपराधिक वारदातों के कमाए गए धन तो जेल तक पहुंचाने की होती है। यही साथी समय-समय पर मिलने पहुंचते हैं और बेसकीमती कपड़े-जूतों से लेकर मोटी धनराशि अपने आकाओं तक जेल में पहुंचाते हैं।

राइटर की रहती है उगाही में विशेष भूमिका
सूत्र बताते हैं हर बैरक का एक राइटर होता है, जो उस बैरक के मानीटर की भूमिका निभाता है। यही बैरक कैदियों से सुविधाएं मुहैया कराने के एवज में शुल्क वसूलता है। इसी के माध्यम से मोटी कमाई का हिस्सा जेल स्टाफ से लेकर ऊपर तक पहुंचाया जता है।

कैदी प्रवीण वाल्मीकि की सेल के शौचालय से इलेक्ट्रानिक उपकरणों के मिलने की जांच शुरू कर दी गई है। न्यायालय से अनुमति मिलते ही जल्द पुलिस टीम जांच के लिए जेल परिसर में जाएगी। इस दौरान अगर अन्य अनियमितताएं सामने आएंगी तो इसकी रिपोर्ट बनाकर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी। – देवेंद्र पींचा, एसएसपी अल्मोड़ा

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