हिंदू बनकर दीक्षा को छला, फिर बेरहमी से कत्ल; बेटी की गवाही से गाजियाबाद के इमरान को उम्रकैद

कृतिका भारद्वाज
जनादेश lनैनीताल में दीक्षा मिश्रा हत्याकांड में जिला अदालत ने कथित प्रेमी इमरान को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इमरान ने पहचान बदलकर दिल्ली-एनसीआर में रियल स्टेट कारोबार से जुड़ी दीक्षा से दोस्ती की और नैनीताल में उसकी हत्या की थी। हत्याकांड में महिला की बेटी की गवाही अहम साबित हुई।जिला शासकीय अधिवक्ता के अनुसार, घटना अगस्त 2021 की है। मूलरूप से इटावा निवासी दीक्षा मिश्रा ग्रेटर नोएडा में रहती थी और रियल स्टेट कारोबार से जुड़ी थी। दीक्षा पति से अलग अपने निजी फ्लैट में बच्ची और मां के साथ रहती थी। इस बीच अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर एक युवक ने दीक्षा से दोस्ती की। खुद का नाम ऋषभ तिवारी बताया। छह माह में वह दीक्षा और उसके परिवार के साथ घुल-मिल गया।जन्मदिन के बहाने नैनीताल घुमाने लाया
जन्मदिन मनाने के बहाने 14 अगस्त 2021 को वह दीक्षा, उसकी सहेली श्वेता शर्मा और अलमास के साथ नोएडा से नैनीताल आया। मल्लीताल में होटल में दो कमरे लिए, जहां एक कमरे में श्वेता और अलमास थे। दूसरे में दीक्षा और अभियुक्त ठहरे। 16 अगस्त की सुबह जब दीक्षा का फोन नहीं उठा और ऋषभ का मोबाइल स्विच ऑफ मिला तो श्वेता और अलमास कमरे में पहुंचे। वहां दीक्षा का शव नग्न अवस्था में बिस्तर पर पड़ा मिला, जबकि ऋषभ फरार था।
मल्लीताल पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की और शव पोस्टमार्टम को भिजवाया। पोस्टमार्टम में मौत की वजह गला दबाने से दम घुटना सामने आई। चेहरा सूजा हुआ और जीभ का दांतों के बीच दबा होना पाया गया। जांच के दौरान होटल के सीसीटीवी फुटेज में घटना के बाद अभियुक्त अटैची लेकर भागता दिखा।
कोर्ट ने दिए आर्थिक सहायता देने के निर्देश
नैनीताल जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रशांत जोशी की अदालत ने 24 फरवरी को अभियुक्त को दोषी मानते हुए शुक्रवार आजीवन कारावास की सजा सुनाई। मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने पैरवी की। अदालत ने उत्तराखंड अपराध से पीड़ित सहायता योजना-2013 के तहत मृतका की माता और पुत्री को आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दिए हैं।
गाजियाबाद से हुई थी आरोपी की गिरफ्तारी
नैनीताल पुलिस ने आरोपी को गाजियाबाद के सिंक रोड बाजार क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। आरोपी की पहचान इमरान पुत्र इत्वेजामू अद्दीन निवासी मकान संख्या-220, पटेल नगर, गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के रूप में हुई। उसने अपनी असल पहचान छुपाकर नाम ऋषभ तिवारी बताकर दीक्षा से दोस्ती की थी। आरोपी से मृतका का मोबाइल फोन भी बरामद हुआ। मामले में अभियोजन पक्ष ने 17 गवाह पेश किए, फॉरेंसिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी न्यायालय में रखे।मृतका की बेटी से पूछा था पासवर्ड
मृतका दीक्षा की बेटी (वर्तमान में 15 वर्षीय) ने कोर्ट में गवाही दी कि घटना के बाद इमरान उनके ग्रेटर नोएडा स्थित फ्लैट पर आया। उसने कहा कि दीक्षा ऑफिस चली गई और अपने मोबाइल का पासवर्ड भूल गई है। उसने लड़की से पासवर्ड पूछा और कुछ कागजात ले गया। अभियुक्त पहले भी फ्लैट पर आता था और पैसों को लेकर अक्सर झगड़ा करता था। जांच में सामने आया कि इमरान पर काफी कर्ज था। दीक्षा से पैसों के लिए पहचान बदलकर दोस्ती की थी।



