उत्तराखंड

कारोबार में नुकसान होने पर घर के दो लोगों की हुई मौत, दादा की 13वीं पर गोली मारकर पोते ने पूरी की कसम

कृतिका भारद्वाज 

जनादेश /रुड़की । दादा की तेरहवीं पर मैनेजर को मौत के घाट उतारने की कसम गोली मारकर पूरी की, लेकिन उसके जिंदा बचने से कन्हैया के दिल में मलाल रह गया। कारोबार में नुकसान होने पर पहले चाचा और फिर दादा की मौत हुई थी। मैनेजर दीपेंद्र कुमार पहले उनके प्लांट में नौकरी करता था।नौकरी छोड़कर चले जाने के बाद सारे ग्राहक उसने नये प्लांट के लिए तैयार कर लिए थे, जिससे कन्हैया के प्लांट को नुकसान हो रहा था। इसके चलते ही उसने मैनेजर को मौत के घाट उतारने की कसम खाई थी।कई राज खोले
गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के पश्चिमी अंबर तालाब निवासी कन्हैया ने गिरफ्तारी के बाद पुलिस के सामने कई राज खोले हैं। उसने पुलिस को बताया कि उनका गंगनहर कोतवाली क्षेत्र के सुनहरा में केमिकल का प्लांट है। कुछ समय पहले दीपेंद्र कुमार निवासी मथुरा विहार कालोनी उनके केमिकल प्लांट पर नौकरी करता था। बाद में संजय मोर्य ने रघुनाथ के प्लाट के पास बनाए गए अपने केमिकल प्लांट पर दीपेंद्र कुमार को मैनेजर रख लिया था।

दीपेंद्र कुमार ने मैनेजर बनने के बाद कन्हैया के केमिकल प्लांट से केमिकल खरीदने वाले सारे ग्राहक को तोड़ लिया था। इससे कन्हैया के केमिकल प्लांट को लगातार नुकसान हो रहा था। परिवार के दो सदस्य की मौत और कारोबार में हो रहे नुकसान से कन्हैया काफी व्यथित हो गया था। उसके दादा की तेरहवीं बुधवार की थी। उसने दादा की तेरहवीं के दिन मैनेजर दीपेंद्र को मौत के घाट उतारने की कसम खाई थी।
बुधवार को कसम पूरी करने के लिए वह दीपेंद्र की हत्या के चक्कर में लग गया। उसे यह मौका रात के समय मिला जब दीपेंद्र पैदल ही काम निपटाकर अपने घर की तरफ जा रहा था। उसने दीपेंद्र को पीछे से गोली मार दी। वह जिंदा न बचे इसके लिए उसने दूसरा राउंड भी तमंचे में भरा, लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया।

घायल दीपेंद्र उसके पीछे दौड़ा तो अन्य लोगों ने भी घेराबंदी कर दी। जिसके चलते वह दूसरी गोली नहीं चला सका। वहीं, पीठ में गोली लगने से दीपेंद्र घायल हो गया। पुलिस की हिरासत में आरोपित ने बताया कि उसे दीपेंद्र के जिंदा बचने का मलाल रह गया है। वह अपनी कसम पूरी तरह से नहीं निभा सका।

Janadesh Express

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