सुप्रीम कोर्ट ने बसंत पंचमी पर विवादित भोजशाला स्थल पर हिंदू-मुस्लिम दोनों को पूजा-नमाज़ की अनुमति दी, समय तय किया

कृतिका भारद्वाज
जनादेश /नई दिल्ली/धार: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के धार जिले स्थित विवादित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद परिसर में बसंत पंचमी के दिन हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदायों को धार्मिक गतिविधियां करने की अनुमति दे दी है। शीर्ष अदालत ने आदेश दिया है कि शुक्रवार को हिंदू श्रद्धालु सूर्योदय से सूर्यास्त तक पूजा कर सकेंगे, जबकि मुस्लिम समुदाय को दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक नमाज़ अदा करने की अनुमति होगी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्या कांत तथा न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने दोनों पक्षों से आपसी सम्मान बनाए रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में राज्य व जिला प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। अदालत ने जिला प्रशासन को पूजा-नमाज़ के दौरान कानून-व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम करने का निर्देश भी दिया।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए धार जिले में लगभग 8,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है, जिनमें केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवान भी शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, शहर भर में सीसीटीवी निगरानी, पैदल व वाहन गश्त के साथ-साथ सोशल मीडिया गतिविधियों पर भी कड़ी नजर रखी जा रही है।
बसंत पंचमी से पहले शहर में केसरिया झंडे और ‘अखंड पूजा’ के होर्डिंग लगाए गए हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यह भी निर्देश दिया कि नमाज़ के लिए आने वाले मुस्लिम समुदाय के लोगों की सूची जिला प्रशासन को दी जाए।
गौरतलब है कि 23 जनवरी, शुक्रवार को बसंत पंचमी और सरस्वती पूजा के साथ-साथ जुमे की नमाज़ भी है। इस दिन भोजशाला परिसर में धार्मिक गतिविधियों की अनुमति को लेकर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने प्रशासन से अनुमति मांगी थी।
हिंदुओं की ओर से भोज उत्सव समिति ने 23 जनवरी को पूरे दिन पूजा की अनुमति मांगी थी, जबकि मुस्लिम समुदाय ने कमाल मौला मस्जिद में दोपहर 1 से 3 बजे तक शुक्रवार की नमाज़ की अनुमति के लिए ज्ञापन सौंपा था।
भोज उत्सव समिति के संरक्षक अशोक जैन ने बताया कि बसंत पंचमी पर भोजशाला में ‘अखंड पूजा’ का आयोजन किया जाएगा, जिसमें 30,000 से 50,000 श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।
वहीं, कमाल मौला नमाज़ इंतजामिया कमेटी के प्रमुख जुल्फिकार पठान ने कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के 7 अप्रैल 2003 के आदेश के अनुसार, बिना किसी बाधा के जुमे की नमाज़ अदा करने की अनुमति मांगी गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदायों से सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि ASI ने 2003, 2013 और 2016 के अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि जब बसंत पंचमी और शुक्रवार की नमाज़ एक ही दिन पड़ती है, तो बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय से दोपहर 1 बजे तक और फिर 3:30 बजे से सूर्यास्त तक होती है, जबकि दोपहर 1 से 3 बजे तक का समय नमाज़ के लिए निर्धारित रहता है।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ASI के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जाए और सांप्रदायिक उन्माद व अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए, साथ ही शांति का संदेश फैलाया जाए। उन्होंने सभी हिंदू और मुस्लिम भाइयों से शांति और सौहार्द बनाए रखने की अपील की।
दिग्विजय सिंह के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मध्य प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता अजय सिंह यादव ने कहा कि भोजशाला विवाद तब सामने आया था जब दिग्विजय सिंह राज्य के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता हमेशा तुष्टिकरण की राजनीति के तहत सनातन धर्म के खिलाफ कदम उठाते रहे हैं। भाजपा नेता ने कहा कि भोजशाला से सनातनी लोगों की गहरी आस्था जुड़ी हुई है।
गौरतलब है कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संरक्षित 11वीं सदी के इस स्मारक को हिंदू समुदाय देवी सरस्वती (वाग्देवी) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।
ASI द्वारा 7 अप्रैल 2003 को की गई व्यवस्था के तहत, भोजशाला परिसर में हिंदू मंगलवार को पूजा करते हैं और मुस्लिम शुक्रवार को नमाज़ अदा करते हैं।



