
कृतिका भारद्वाज
जनादेश /उत्तराखंड /देहरादून: नैनीताल की एक अदालत ने उस महिला को 18 फरवरी को पेश होने का निर्देश दिया है, जिसने “जमानत का दुरुपयोग किया और फरार हो गई।” महिला पर 2019 के एक मामले में अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने पति को जलाकर मारने का आरोप है। अपर सत्र न्यायाधीश ने नैनीताल के एसएसपी से फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए किए जा रहे प्रयासों पर प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है।
अदालत के पिछले सप्ताह के निर्देशों के बाद, एसएसपी मंजुनाथ टीसी ने मंगलवार को सात सदस्यीय पुलिस टीम गठित की, जिसमें स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के जवान भी शामिल हैं। टीम को रुद्रपुर के काशीपुर रोड स्थित शमिया लेक सिटी निवासी नीलम चौधरी और उसके प्रेमी मनीष मिश्रा (निवासी फूलपुर, प्रयागराज) की तलाश और गिरफ्तारी का जिम्मा सौंपा गया है।
यह घटना 20 मई 2019 की है, जब मृतक अवतार सिंह के पिता गुलजार सिंह ने एफआईआर दर्ज कराई थी। अवतार सिंह का जला हुआ शव भीमताल के पास एक जली हुई कार के अंदर मिला था। शिकायत में गुलजार सिंह ने आरोप लगाया था कि मैनपावर सप्लाई का काम करने वाले अवतार सिंह ने अपनी पत्नी के मनीष मिश्रा के साथ कथित अवैध संबंधों पर कई बार आपत्ति जताई थी।
पुलिस ने भीमताल थाने में आईपीसी की विभिन्न धाराओं—302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), 120बी (आपराधिक साजिश), 328, 404 और 411—के तहत एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया था।
मनीष मिश्रा को दिसंबर 2021 में 45 दिनों की अल्पकालिक जमानत मिली थी, जबकि नीलम को जून 2024 में एक सप्ताह की अल्पकालिक जमानत पर रिहा किया गया था। दोनों द्वारा जमानत की शर्तों का उल्लंघन कर फरार होने के बाद, मनीष के खिलाफ फरवरी 2022 में और नीलम के खिलाफ जनवरी 2025 में गैर-जमानती वारंट जारी किए गए।
इस महीने की शुरुआत में अदालत में सौंपी गई रिपोर्ट में भीमताल थाने के उपनिरीक्षक महेंद्र राज सिंह ने बताया कि नीलम की गिरफ्तारी के लिए रुद्रपुर स्थित उसके घर पर कई बार छापेमारी की गई, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। उसके ससुर गुलजार सिंह और बेटी नेहा ने पुलिस को बताया कि जमानत पर रिहा होने के बाद से वे उससे संपर्क नहीं कर पाए हैं। मनीष के घर पर की गई छापेमारी भी बेनतीजा रही, जहां पड़ोसियों ने बताया कि वह अब वहां नहीं रहता।
नीलम की जमानतदार, होमगार्ड कमला जोशी ने पुलिस को बताया कि वह 2010 से नीलम को जानती हैं और उसी कॉलोनी में रहती थीं। हल्द्वानी जेल में नीलम के बंद होने के दौरान उसके अनुरोध पर उन्होंने जमानतदार बनने की सहमति दी थी। दूसरे जमानतदार भवान सिंह ने बताया कि उन्होंने एक पड़ोसी के कहने पर गारंटी दी थी।