चारधाम यात्रा के लिए मुख्यमंत्री ही जिम्मेवार क्यों ?
पक्ष व विपक्ष दोनों के शासनकाल मे दिक्क़ते आई है, आवश्यकता से ज्यादा भीड़ भी है असुविधा के लिए जिम्मेवार

अभय कुमार की रिपोर्ट –
बिदित हो की चारधाम यात्रा को लेकर इतनी हाय तौबा मची हुई है, उत्तराखंड में कुछ भी हो रहा है उसके लिए मीडिया से लेकर विपक्ष तक सभी लोग पुष्कर सिंह धामी को जिम्मेदार ठहराने लग रहे हैं. अब सवाल यह उठता है, की क्या एक मुख्यमंत्री के पास एक ही काम होता है, चलिए मान लेते हैं कि मुख्यमंत्री किसी एक व्यवस्था को सुचार रूप से संचालित करने का प्रावधान बनता है तब तक दूसरी व्यवस्था बिगड़ जाती है, ईश्वरीय कृपा कहिए अथवा शासन प्रशासन का सहयोग की सारी व्यवस्थाएं सुदृढ़ हो जाती हैं. एक निश्चित सीमा में लोगों की आवाज आई का एक व्यवस्था बनाया जाता है, गाइडलाइन निकालने के बावजूद भी आवश्यकता से ज्यादा लोग यात्रा के लिए निकल पड़ते हैं, फिर इसके लिए उन नागरिकों की जवाब दे ही क्यों नहीं जो रजिस्ट्रेशन नहीं मिलने की स्थिति में भी यात्रा पर निकल पड़ते हैं. ऐसे में सरकार अपने मशीनरियो की क्षमता से ज्यादा सुविधा कैसे दे पाएगी. इसके लिए केवल एक व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार ठहरने से बेहतर होगा, की पक्ष विपक्ष के लोग इसके साथ-साथ समाज के संभ्रांत व बुद्धिजीवी प्रवर के लोग आपस में मिलजुल कर इस समस्या से समाधान निकालें तो शायद यात्रा भी सुगम होगी और कोई भी पक्ष किसी पक्ष के ऊपर कोई भी आरोप प्रत्यारोप नहीं करेगा. हमारे कई पत्रकार मित्र सरकार की कमियां और सरकार की लापरवाही को गिनाते नजर आ रहे हैं, मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है, लेकिन आज के परिवेश में यह स्तंभ खबरों में किसी भी तरह की कोई पारदर्शिता नहीं रख रहा है. जो मीडिया के सम्मान पर खुद ही प्रश्न चिन्ह लगता नजर आ रहा है. पहले के लोकतंत्र के चौथे प्रहरियों की कलम व सरकार के गतिविधि और समाज की विकृतियों पर पैनी नजर रहती थी, और उनके खबरों का संतुलन इतना जबरदस्त होता था कि सरकार के साथ-साथ समाज भी जागरूक होता था. आज की खबरों का प्रकाशन व प्रसारण इस प्रकार का है कि लोग खबर को देखते और सुनते ही तुरंतयह धारणा बना ले रहे हैं, कि अमुक मीडिया सरकार के पक्ष में बात कर रहा है और आमुख मीडिया सरकार के विरोध में बात कर रहा है, यानी यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं मीडिया के लोग अथवा मीडिया हाउस भी किसी न किसी पक्ष या विपक्ष के लिए काम कर रहा है, जो भविष्य में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर संकट खड़ा करने का संदेश दे रहा है.इसलिए समय रहते लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के प्रहरियों को वर्तमान की भाषा में हमारे पत्रकार बंधुओ को, अपनी पत्रकारिता का आयाम बदलना होगा और अपने भविष्य को लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप मेंअधिक रहने के लिए स्थापित करना होगा. ज्यादा जानकारी के लिए अध्यात्म से संबंधित एक व्यक्तित्व का परिचय करना चाहता हूं एक नारद मुनि हुआ करते थे जो अपनी बात आसानी से हर व्यक्तियों तक पहुंचा देते थे चाहे वह देव हो या दानव हो और सर्वत्र पूजनीय थे, उसे समय के मीडिया हाउस से लेकर पत्रकार तक वह अकेले स्वयं थे. आज तो हजारों मीडिया हाउस है और लाखों पत्रकार है, फिर भी हम अपनी बात को सही तरीके से समाज के सामने नहीं रख पा रहे हैं और पक्ष और विपक्ष हम खुद बनते जा रहे है. ऊपर में केवल उत्तराखंड के चार धाम यात्रा और पुष्कर सिंह धामी का नाम इसलिए लेना पड़ा ताकि इस समय चार धाम यात्रा को लेकर जिस प्रकारकी कवरेज हो रही है, वह विश्व के पटल पर उत्तराखंड को बदनाम करने के लिए गहरी साजिश है, खबरों को सही तरीके से भी प्रस्तुत किया जा सकता है, दिक्कतें हर जगह होती हैं पर दिक्कतों के समाधान का तरीका भी दिखाना पड़ता है जो जरूरी है जिन्हें दिक्कत हो रही है, उनकी भी कुछ नैतिक जिम्मेदारी थी. वह अपनी नैतिक जिम्मेदारियां को छोड़कर के सरकार के ऊपर दोसा रोपण कर रहे हैं, जो सही नहीं प्रतीत हो रहा. आमजन से अपील है कि इस खबर को पढ़ने के बाद आप भी सरकार का सहयोग करें, जिससे चार धाम यात्रा को सुगम व सरल बनाया जा सके, आवश्यकता से अधिक भीड़ इकट्ठा करने की जरूरत नहीं है, आप धीरे धीरे और नियमों का पालन करे यात्रा शुगम होती चली जाएगी, आने वाले कुछ समय मे सब कुछ सही हो जायेगा कोई राजा अपनी प्रजा पर जुल्म नहीं करता पर व्यवस्थाओ को बरकरार रखने मे आप सब की भी जरूरत पड़ती है और आपको अपनी जबाबदेही तय करनी पड़ेगी
जय. महादेव !!