कर्मचारी बीमारी का बहाना बनाने पर परेशानी में पड़ सकते हैं, जांच का सामना करना पड़ेगा

राज्य में तबादला सत्र शुरू होते ही विभिन्न विभागों में कर्मचारियों और अधिकारियों की ओर से स्थानांतरण के लिए अनेक आवेदन आने लगते हैं। हालांकि उत्तराखंड में ट्रांसफर नीति लागू है, फिर भी हर वर्ष कई कर्मचारी दुर्गम क्षेत्रों में तैनाती से बचने या अपनी पसंदीदा जगह पर तबादला पाने के लिए अलग-अलग कारण प्रस्तुत करते हैं। इनमें स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला सबसे अधिक दिया जाता है।
इसी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने अब ऐसे मामलों में सख्ती बरतने का निर्णय लिया है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा है कि गंभीर बीमारी के आधार पर तबादले की मांग करने वाले डॉक्टरों और कर्मचारियों के मामलों की गहन जांच कराई जाएगी। यदि जांच में बीमारी वास्तविक पाई जाती है तो नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी, लेकिन यदि कोई कर्मचारी या अधिकारी फर्जी दस्तावेजों अथवा गलत जानकारी के आधार पर तबादला हासिल करने की कोशिश करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
दरअसल, लंबे समय से यह शिकायत मिलती रही है कि कई कर्मचारी और अधिकारी दुर्गम क्षेत्रों में नियुक्ति से बचने के लिए स्वास्थ्य संबंधी कारणों का सहारा लेते हैं। इसी प्रवृत्ति पर रोक लगाने के लिए सरकार ने अब कड़ा रुख अपनाने के संकेत दिए हैं।