उत्तराखंड

देश के डेढ़ करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में, कभी भी मौत दे सकती है दस्तक

अभय कुमार की रिपोर्ट –

डेढ़ करोड़ लोगों की जिंदगी खतरे में है. अगर यकीन न हो तो इस खबर को पढ़ लीजिए. दरअसल जैसे-जैसे वैश्विक तापमान बढ़ रहा है ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार भी तेज होती जा रही है. इसी कारण ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड की घटनाएं हिमालय क्षेत्र में बढ़ी हैं और अभी तक घटनाओं का सिलसिला जारी रहने की आशंका है.

अगर ऐसा होता है तो 16 जून, 2013 की रात को जो हादसा केदारनाथ घाटी में घटित हुआ वो फिर से घटित हो सकता है और हिंदू कुश हिमालय के क्षेत्र वाले 1.5 करोड़ लोगों का जीवन खतरे में है. अगर ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड का प्रकोप शुरू हुआ तो हिमालयी नदियों के किनारे बसे लोगों का जीवन मुश्किल में पड़ जाएगा.

दरअसल हिंदुकुश अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, चीन, भारत, म्यांमार, नेपाल और पाकिस्तान में 3,500 किमी (2,175 मील) तक फैला है. उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड सरकार ने क्षेत्र में पांच संभावित खतरनाक हिमनद झीलों से उत्पन्न खतरे का मूल्यांकन करने के लिए विशेषज्ञों की दो टीमों का गठन किया है. ये झीलें ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) से ग्रस्त हैं, जिस तरह की घटनाओं के परिणामस्वरूप हाल के वर्षों में हिमालयी राज्यों में कई आपदाएं हुई हैं.

क्या है ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट

ग्लेशियर जब तेज़ी से आकार बदलते हैं तो इनके पिघलने से मैदानी क्षेत्रों में पानी का बहाव अत्यधिक हो जाता है. इस बहाव से प्राकृतिक बांध/झील टूट जाते हैं जिससे बाढ़ की स्थिति हो जाती है और इस परिघटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड्स कहते हैं. इसके कारण अपरदन, जल दबाव, हिमस्खलन या ग्लेशियरों के नीचे भूकंप हो सकते हैं.

Janadesh Express

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