सीएम साहब व जिलाधिकारी मैडम एक नजर ट्रेजरी कार्यालय पर
ट्रेजरी आफिस का खेल, मामला स्टाम्प ड्यूटी वापसी का !

जनादेश एक्सप्रेस /देहरादून –
” एडीएम कार्यालय से ट्रेजरी और उपभोक्ता तक सुबिधा पहुंचने मे लगे 2 वर्ष, जबकि लाभार्थी के संस्थान की दुरी महज 18 किलोमीटर ही थी. ” कई ऐसे मामले भी है जो जाँच होने पर सामने आएंगे, जिसे विभागीय जाँच के बाद सही किया जा सकता है. “
ट्रेजरी कार्यालय के कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से स्टाम्प ड्यूटी पेमेंट वापसी का आदेश पारित होने के वावजूद उपभोक्ता के खाते मे हस्तानतरित होने के वजाय किसी और के खाते मे कर दिया गया मामला एक निजी विश्वविधायल के स्टाम्प ड्यूटी वापसी का वर्ष 2017 से शुरू फ़िर कमीशनरी के आदेश 2022 के बाद भी उपभोक्ता को गोल गोल घुमा कर भुगतान किसी अन्य खाते मे कर दिए गए,उपभोक्ता सही भुगतान दिए जाने के बावजूद भी भुगतान करने मे 2 वर्ष का समय लगा दिया गया अब सवाल यह उठता है की यही कार्य किसी अन्य सामान्य व्यक्ति अथवा संस्थान द्वारा किया गया होता तो पता नहीं उसके ऊपर कौन कौन सी कार्यवाही तय कर दी गई होती, अब तो एडीएम साहब व ट्रेजरी कार्यकय के वरिष्ठ पदाधिकारियों को यह तय करना होगा की दोषी व्यक्ति के ऊपर किस प्रकार की कार्यवाही होंगी या महज मानवीय भूल करार दिया जाएगा यह तो आने वाला समय बताएगा परन्तु सवाल यह भी उठता है की उपरोक्त बिषय मे पीड़ित केवल एक ही संस्थान है या इस श्रेणी मे कुछ और भी संस्थान है. ट्रेजरी कार्यालय द्वारा किये गए खेल की डिटेल और उसमे हुए पत्राचार की कॉपी आप सब के बीच रखी जा रही है आगे मतदान होने के उपरांत इस बिषय पर संबंधित पदाधिकारियों से इस पर प्रतिक्रिया ली जाएगी क्योंकि जब संपर्क करने का प्रयास किया गया तो बात नहीं हो सकी.
शेष अगले अंक मे….
