4 करोड़ की NCERT की नकली किताबें जब्त; यूपी, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में होनी थी सप्लाई

कृतिका भारद्वाज
जनादेश lउत्तराखंड के रुद्रपुर में बीती रात एनसीईआरटी की कथित रूप से नकली किताबें पकड़ी गईं। पुलिस, तहसील प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त कार्रवाई में एक गोदाम पर छापेमारी में मिली किताबों की कीमत लगभग चार करोड़ रुपये बताई जा रही है। गोदाम सील कर जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि ट्रक में लादकर किताबों को मेरठ भेजा जा रहा था।पुलिस ने शनिवार रात एनसीईआरटी की किताबों से भरा ट्रक पकड़ा। किताबों के बिल जांच में संदिग्ध लगे। इसके बाद ट्रक ड्राइवर की निशानदेही पर रात में ही कीरतपुर स्थित गोदाम पर छापेमारी की। यहां कक्षा एक से 12 तक की किताबें थीं। प्रथमदृष्टया ये किताबें भी नकली लगीं। पता चला कि यही किताबें ट्रक में भरकर मेरठ भेजी जा रही थीं।कई राज्यों में होनी थी सप्लाई
जांच में सामने आया कि ये किताबें उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना समेत कई राज्यों में सप्लाई हो रही थीं। पुलिस के अनुसार, गोदाम के मालिक राजेश जैन ने संदीप नामक व्यक्ति को बीती एक जनवरी से किराये पर दिया। पुलिस गोदाम मालिक से पूछताछ कर रही है।
तहसीलदार दिनेश कुटोला ने बताया कि ट्रक और गोदाम को सीज कर दिया है। यूएसनगर के मुख्य शिक्षा अधिकारी एचके मिश्रा ने बताया कि नई दिल्ली स्थित एनसीईआरटी मुख्यालय को पत्र भेज जांच को टीम भेजने का अनुरोध किया है।नकली किताबों का धंधा
ग्राम कीरतपुर में पकड़े गए नकली एनसीईआरटी किताबों के बड़े जखीरे ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि नकली किताबों का यह धंधा लंबे समय से देश के कई हिस्सों में सक्रिय है, जहां सस्ते दामों का लालच देकर बाजार में इन पुस्तकों को खपाया जाता है। असली किताबों की तुलना में नकली एनसीईआरटी पुस्तकें अक्सर कम गुणवत्ता वाले कागज और खराब छपाई के साथ तैयार की जाती हैं। कई बार इनमें पाठ्य सामग्री में भी त्रुटियां होती हैं, जिससे छात्रों की पढ़ाई प्रभावित होती है। इसके बावजूद कम कीमत के कारण कुछ थोक व्यापारी और दुकानदार इन्हें खरीदकर बाजार में बेच देते हैं।कहां से संचालित होता है फर्जी किताबों का नेटवर्क
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, फर्जी किताबों का नेटवर्क आमतौर पर बड़े गोदामों और गुप्त प्रिंटिंग इकाइयों के जरिए संचालित होता है। यहां से ट्रक या छोटे वाहनों के माध्यम से अलग-अलग राज्यों में इनकी सप्लाई की जाती है। कीरतपुर में पकड़ा गया मामला भी ऐसे ही एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि जांच के बाद यदि किताबें नकली साबित होती हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ कॉपीराइट उल्लंघन और धोखाधड़ी की धाराओं में कड़ी कार्रवाई की जाएगी।ये है एनसीईआरटी की किताबों की पहचान
असली एनसीईआरटी किताबों की पहचान के लिए मुख्य रूप से फ्रंट कवर पर लोगो, होलोग्राम और हर दूसरे-तीसरे पन्ने पर हल्का वाटरमार्क (लोगो के साथ) होता है। असली पुस्तकें अच्छी गुणवत्ता वाले सफेद कागज पर मुद्रित होती हैं। असली किताबों की छपाई और तस्वीरें साफ और शार्प होती हैं।
शैक्षणिक सत्र से बाजार में खपाने का अंदेशा
पुलिस के अनुसार, लगभग एक हजार वर्गमीटर के इस गोदाम को उसके मालिक राजेश जैन ने संदीप नाम के व्यक्ति को एक जनवरी से 30 नवंबर तक किराया पर दिया है। अंदेशा जताया है कि यह गोदाम नकली किताबों के गिरोह के नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले बाजार में बड़ी मात्रा में नकली किताबें खपाने का अंदेशा है। बता दें कि एनसीईआरटी अपनी किताबों का प्रकाशन एवं वितरण अपने क्षेत्रीय केंद्रों, राज्य शिक्षा विभागों, अधिकृत थोक विक्रेताओं और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करता है।



